BHAVNA GUPTA
(UPPCS 2004)

 

 
 

 
 
  आपकी सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।  

धन्यवाद

 

सिविल सेवा परीक्षा में आपकी सफलता का रहस्य क्या है ?

 

निरन्तरता एवं ईमानदारी से किया गया प्रयत्न, सही रणनीति, स्तरीय पाठ्य सामग्री का चयन एवं विपरीत परिस्थिति मे भी धैर्य न खोना।

 

इस परीक्षा की गहन तैयारी के लिए आपके विचार में कितने समय की आवश्यकता है ?

 

स्नातक के पश्चात् लगभग १ वर्ष का गहन एवं सतत अध्ययन।

 

साक्षात्कार बोर्ड के बारे में आपके क्या विचार है ?

 

बोर्ड का रवैया सहयोगात्मक एवं साकारात्मक होता है। बोर्ड के सदस्य हमे चयनित करने की मंशा से ही वहाँ बैठे होते है और प्रत्याशी के सकारात्मक दृष्टिकोण एवं आत्मविश्वास, परिस्थिति सम्भालने की क्षमता के आधार पर अंक देते हैं ।

 

भावी अभ्यर्थियों के लिए आप क्या सलाह वह संदेश देना चाहेंगे ?

 

अध्ययन में निरन्तरता रखे, धैर्य, स्वयं की क्षमता में विश्वास एवं इस सार्वभौमिक सत्य मे भी कि ''शुभ संकल्प एवं ईमानदार प्रयत्न'' हमेशा पूरे होते है।

 

सिविल सेवाओं को अपना कैरिअर बनाने की प्रेरणा आपको कहॉं से मिली ? क्या आपको जीवन की कोई उल्लेखनीय घटना याद है, जिसने सिविल सेवा को कैरिअर के रूप में अपनाने के लिए आपको प्रेरित किया हो ?

 

श्री धनप्रकाश गुप्ता मेरे दादा जी जिसमें पद, प्रतिष्ठा, सम्मान के साथ-साथ सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि हमारा निर्णय बहुत से लोगो के जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

 

आपके परिजनों व मित्रों से आपकी इस सफलता में किस प्रकार से सहायता की ?

 

जब कभी तैयार के दौरान अवसाद या निराशा आई तो मित्रों एवं परिजनो ने पुनः लक्ष्य की याद दिलाकर सकारात्मक ऊर्जा जाग्रत की एवं हमें हमारी क्षमताओं का बार-बार ध्यान दिलाया।

 

यदि आपका चयन सिविल सेवाओं के लिए नहीं हो पाता तो इसके विकल्प के रूप में आप किस क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाना पसन्द करते ?

 

वैसे तो एकमात्र यही लक्ष्य था परन्तु विकल्प के रूप मे अध्ययन के क्षेत्र मे कार्य करती इसके लिए जे.आर.एफ. परीक्षा भी उर्त्तीण की थी।

 

आप इस सफलता को किस रूप में देखते हैं ?

 

यह सफलता चिर परिचित स्वपन के पूर्ण होने जैसी थी। इससे 'मानस' की इन पंक्तियो मे ''जिसका जिस पर सत्य स्नेह होता है, वह उसे निश्चित मिलता है, इसमें कोई सन्देह नहीं'' मेरा विश्वास और बढ़ गया। लक्ष्य में प्रति पूर्ण समर्पण एवं निष्काम कर्म निश्चित ही सफलता की ओर ले जाते हैं।

 

सिविल सेवा परीक्षा में आपके ऐच्छिक विषय क्या थे तथा इनके चयन का आपका मापदंड क्या था ?

 

१. इतिहास,
२. हिन्दी साहित्य।
दोनो विषयो का संयोग पिछले वर्षों में काफी अंकदायी रहा है। स्तरीय पुस्तकों एवं पाठ्य सामग्री का उपलब्धता एवं विषय में रुचि, चयन का मापदण्ड रहा।

 

क्या चयन हेतु वर्तमान परीक्षा प्रणाली उपयुक्त है ? इसमें सुधार के लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगे ?

 

चयन की प्रणाली उपयुक्त है। पूरी परीक्षा का चक्र पूरा होने मे लगभग १ वर्ष का समय लग जाता है, जिसे कम किया जा सकता है।

 

क्या आप सोचते हैं कि सिविल सेवा परीक्षाओं में बैठने के अवसरों की संख्या पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए ?

 

प्रतिबन्ध नही लगना चाहिए क्योंकि अधिकांश अभ्यर्थी ऐसी पृष्ठभूमि से आते है कि परीक्षा की प्रणाली व रणनीति समझ आने तक अवसर समाप्त हो चुके होते हैं । प्रतिबन्ध का आधार आयु हो सकता है।

 

अपना परीक्षा परिणाम जानने से पूर्व टॉपर्स के बारे में आपके क्या विचार थे ? क्या आप अपनी सफलता के प्रति आश्वस्थ थे ?

 

मेरा मानना था कि टॉपर्स सामान्य व्यक्ति ही होते है जो निरन्तर परिश्रम, समर्पण एवं ईमानदारी से प्रयास करके सफलता का शिखर पाते हैं। मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार अच्छा होने के कारण में सफलता के प्रति आश्वस्त थी।

 

आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?

 

ईश्वर की अनुकम्पा, अपने दादा जी के आर्शीवाद एवं परिवार के सदस्यों एवं मित्रों का सहयोग जिन्होंने लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।

 

आपने कितने प्रयासों में यह सफलता अर्जित की ? आपकी सेवा प्राथमिकताएं क्या थी ?

 

यह मेरा तीसरा प्रयास था।

 

परीक्षा की तैयारी व परीक्षा भवन में समय प्रबन्धन के लिए आपकी क्या नीति रही ?

 

तैयारी एवं परीक्षा भवन में समय प्रबन्धन का सफलता में विशेष योगदान है। परीक्षा भवन में प्रवेश से पूर्व ही मैंने सभी प्रश्नों के लिए समय निर्धारित किया एवं शुरू के १५ मिनट हर उत्तर की रूपरेखा तैयार करने में लगाए।

 

प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार की तैयारी के लिए आपकी क्या योजना रही है ?

 

प्रारम्भिक परीक्षा- पुस्तक के अध्ययन के पश्चात बिन्दुसार नोट्स तैयार करके उन्हें पढ़ना एवं नियमित रूप से दोहराना।

मुख्य परीक्षा- प्रतिदिन २ या ३ प्रश्नों (पिछले वर्षों में पूछे गये) का उत्तर लिखना एवं उनके मूल्याँकन। विश्लेषणात्मक अध्ययन। उत्तर लिखते उसे नवीनतम राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं से जोडते हुए नवीनता एवं मौलिकता का समावेश।

साक्षात्कार- आत्मविश्वास, शांत मस्तिष्क, सकारात्मक दृष्टिकोण, चेहरे पर प्रातिक मुस्कान, अपने कर्म एवं ईश्वर की क्रपा में विश्वास।

 

आपके विचार में सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में न्यूनतम कितना समय चाहिए तथा तैयारी किस स्तर से प्रारम्भ करनी चाहिए ?

 

स्नातक के दौरान तैयारी प्रारम्भ कर देनी चाहिए। तथा उसके पश्चात न्यूनतम १ वर्ष का समय चाहिए।

 

सिविल सेवा परीक्षाओं में माध्यम का क्या महत्व है ?

 

जिस माध्यम से सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति दे सकें, वही माध्यम चुनें।

 

सिविल सेवा प्रारम्भिक परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के आरोपण के सन्दर्भ में आपके क्या विचार है ? क्या इसने नियमित प्रश्न अभ्यास का महत्व बढ़ा दिया है ?

 

सिविल सेवा परीक्षा के प्रश्न पत्र पहले ही इतने स्तरीय रहे हैं कि नियमित प्रश्न अभ्यास के बिना परीक्षा को भेद पाना सम्भव नहीं है। नेगेटिव मार्किग ने प्रत्याशियों पर अनावश्यक दबाव बनाया है।

 

इस परीक्षा की तैयारी के दौरान आपकी सबसे बड़ी भूल क्या थी ?

 

यद्यपि प्रथम प्रयास में ही मैं साक्षात्कार तक पहुँची थी परन्तु समय प्रबन्धन में चूक तथा पिछले वर्षों में परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों के आधार पर मैं सही रणनीति नहीं बना पाई, अतः चूक गई। बाद में ये कमियाँ दूर की एवं प्रत्याशित सफलता मिली।

 

कृपया उस पाठ्य सामग्री का सूचीबद्ध करे जिसका प्रयोग आपने इस परीक्षा की तैयारी के दौरान किया ?

 

NCERT, के.सी.श्रीवास्तव, झा एवं श्रीमाली, मध्यकालीन भारत-हरिश्चन्द्र वर्मा, I & II, NCERT, बी.डी.महाजन, आधुनिक भारत-ग्रोवर एवं यशपाल-विपिन चन्द्रा, NCERT, रामलखन शुक्ल, इग्नू, भारतीय इतिहास-किरण काम्पीटिशन टाइम्स, विश्व इतिहास-जैन एवं माथुर
सामान्य अध्ययन
- NCERT की पुस्तकें, यूनीक गाइड, प्रतियोगिता दर्पण, परीक्षा मंथन सीरीज, हिन्दुस्तान।

 
 

आपके विचार में सिविल परीक्षाओं के लिए रणनीतिक तौर पर नियमित स्वमूल्यांकन का क्या महत्व है ?

 

नियमित स्वमूल्याँकन से अभिव्यक्ति परिष्कृत होती रहती है। अपनी कमियों का पता लगता रहता है एवं उनमें सुधार करके सफलता की राह को आसान बनाया जा सकता है।

 

सिविल सेवा परीक्षाओं के स्वमूल्यांकन व संवाद के प्लेटफार्म के रूप में www.nceiindia.com को आप किस रूप में देखते हैं ?

 

www.nceiindia.com उन प्रतियोगियों के लिए जो किसी कारणवश महानगरों में उपलब्ध स्तरीय पाठ्य सामग्री विशेषज्ञ सलाह अथवा कोंचिग सुविधा से वंचित रह जाते हैं ऐसा साधन है जिससे वे एक साथ एक ही स्थान पर बैठकर स्तरीय पाठ्य सामग्री एवं विशेषज्ञ सलाह का लाभ ले सकते हैं एवं स्वमूल्यांकन के माध्यम से अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं।

 

हिन्दी माध्यम में ऑनलाइन मूल्यांकन सुविधा की उपलब्धता का इस परीक्षा के प्रतियोगियों के लिए क्या महत्व है ?

 

हिन्दी माध्यम से तैयारी करने वाले प्रतियोगियों की वृहद संख्या एवं ऑनलाइन मूल्यांकन सुविधा उपलब्ध कराने वाली एकमात्र साइट होने के कारण  www.nceiindia.com का महत्व स्वयं सिद्ध है। हिन्दी माध्यम से अभ्यर्थियों के लिए यह वरदान की भाँति है।

 

www.nceiindia.com की अवधारणा के विषय में आपके क्या विचार है ?

 

स्वमूल्यांकन एवं संवाद की अवधारणा परीक्षा की तैयारी के लिए रामबाण है। नियमित स्वमूल्याँकन, परीक्षा भवन में होने वाली चूकों से बचाता है एवं संवाद से वैचारिक आदान-प्रदान, समस्या के समाधान एवं वैचारिक दृष्टिकोण की वृहदता में सहायता मिलती है।

 

धन्यवाद सफल व प्रतिष्ठापूर्ण जीवन के लिए हमारी शुभकामनाएं।

 

जी धन्यवाद।

 

 

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